जिले की सांस्कृतिक एवं पर्यटन विरासत को दर्शाता वित्तीय वर्ष कैलेंडर : झाबुआ के धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय कला एवं परंपराओं को दर्शाया गया है।
Chandr shekhar
Sun, Apr 12, 2026
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने किया झाबुआ जिले की सांस्कृतिक एवं पर्यटन विरासत को दर्शाता वित्तीय वर्ष कैलेंडर का विमोचन किया।
झाबुआ से चंद्रशेखर राठौर की रिपोर्ट।
महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया द्वारा वित्तीय वर्ष आधारित झाबुआ जिले के विशेष कैलेंडर का विमोचन किया गया। यह कैलेंडर कलेक्टर नेहा मीना के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है, जिसका संकलन नोडल अधिकारी एसडीएम तनुश्री मीणा द्वारा किया गया।
मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कैलेंडर की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल झाबुआ जिले की समृद्ध सांस्कृतिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक विरासत को एक सशक्त मंच प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास न केवल स्थानीय परंपराओं और जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करते हैं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन की इस अभिनव पहल की प्रशंसा करते हुए इसे अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक बताया।

कलेक्टर नेहा मीना ने कहा कि यह कैलेंडर जिले की पहचान, परंपरा और विविधता को एक व्यवस्थित स्वरूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है। प्रत्येक माह की थीम के माध्यम से झाबुआ के धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय कला एवं परंपराओं को दर्शाया गया है। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य स्थानीय धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ युवाओं एवं आमजन में जागरूकता बढ़ाना तथा जिले को पर्यटन के रूप में स्थापित करना है।
यह कैलेंडर झाबुआ जिले की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विरासत को मासिक थीम के माध्यम से प्रदर्शित करता है, जो जिले की समृद्ध पहचान को दर्शाता है।

माहवार थीम इस प्रकार हैं :
अप्रैल – श्रृंगेश्वर महादेव मंदिर
माही एवं मधूकन्या नदी के पवित्र संगम पर स्थित यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। माही बांध के डूब क्षेत्र में आने के पश्चात इस मंदिर का पुनर्निर्माण पहाड़ी पर किया गया, जहाँ भगवान महादेव, पंचमुखी हनुमान जी एवं माही माता की प्रतिमाएँ स्थापित हैं।
मई – देवल फलिया महादेव :
राणापुर से 13 किमी दूर स्थित 11वीं सदी का यह प्राचीन मंदिर पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। यहाँ पंचमुखी शिवलिंग एवं उत्कृष्ट शिल्पकला पर्यटकों को आकर्षित करती है।
जून – थांदला बावड़ी :
ऐतिहासिक बावड़ी में स्थित मंदिर अपनी सुंदर शिल्पकला और धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थानीय जनजातीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण स्थल है।
जुलाई – माही डेम
झाबुआ के उत्तर-पूर्व में स्थित यह बांध 3060 मीटर लंबा है, जो पेयजल, कृषि एवं हरितिमा के लिए महत्वपूर्ण योगदान देता है।
अगस्त – पिथौरा चित्रकारी
जनजातीय भित्ति-चित्रकला ‘पिथौरा’ अन्न देवता को समर्पित होती है। इसमें प्रकृति एवं जीवन से जुड़ी आकृतियों को सतरंगे रंगों में उकेरा जाता है। पिटोल ग्राम की भूरी बाई को इस कला के लिए पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ है।
सितम्बर – हाथीपावा
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थल हरितिमा संरक्षण एवं जनसहभागिता (हलमा) का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहाँ विविध पक्षी, खरगोश एवं मयूर पाए जाते हैं और यह लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।
अक्टूबर – श्री विश्वमंगल हनुमान धाम, तारखेड़ी
पेटलावद तहसील में स्थित यह सिद्धपीठ हनुमान जी का स्वयंभू स्थल माना जाता है। यहाँ विभिन्न धार्मिक अवसरों पर विशेष पूजा-अर्चना होती है तथा अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती है।
नवम्बर – कालका माता मंदिर
झाबुआ का यह प्राचीन दक्षिणमुखी सिद्धपीठ नवरात्रि में विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। यहाँ काकड़ आरती एवं पारंपरिक गरबा का आयोजन किया जाता है।
दिसम्बर – कड़कनाथ एवं खरमोर
कड़कनाथ अपनी उच्च पोषण क्षमता के लिए प्रसिद्ध है एवं GI टैग प्राप्त है। साथ ही खरमोर पक्षी जिले की जैव विविधता की विशेष पहचान है।
जनवरी – बाबादेव (डूंगर देव) मंदिर
राणापुर के समोई ग्राम में स्थित यह प्राचीन मंदिर भील जनजाति का प्रमुख आस्था केंद्र है, जहाँ विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं।
फरवरी – बैलगाड़ी से बारात
आदिवासी समाज की यह परंपरा सादगी, सांस्कृतिक मूल्यों एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।
मार्च – भगोरिया हाट
होली से पूर्व आयोजित यह उत्सव आदिवासी संस्कृति की पहचान है। इसमें लोकनृत्य, गीत-संगीत एवं पारंपरिक खरीदारी प्रमुख आकर्षण होते हैं।
यह कैलेंडर न केवल झाबुआ जिले की विविधता को दर्शाता है, बल्कि पर्यटन, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विमोचन के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जितेन्द्र सिंह चौहान एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व झाबुआ महेश कुमार मंडलोई एवं लोक सेवा प्रबंधक संत कुमार चौबे उपस्थित रहे।
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